Delhi Amritsar Katra Expressway: दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे अब केवल तेज रफ़्तार के लिए ही नहीं बल्कि सुहावना और ताज़ा हवा दार भी होने जा रहा है। जिसके चलते अब इस सफर पर पूरी हरियाली रहेगी। सोनीपत के गोहाना खंड में वन विभाग ने एक्सप्रेसवे के किनारे ग्रीनबेल्ट बनाने के लिए एक मुहीम चलाई गई है। इस बार विभाग की और से उड़ाने तरिके से पेड़ न लगाकर नए वैज्ञानिक तरिके से पेड़ लगाए जाएगें। यहाँ पौधे लगाने से पहले एक्सप्रेसवे की मिटटी की जाँच की जाएगी। जिसके चलते इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि वह पौधे केवल पनपें नई नहीं बल्कि विशेष परस्तिथियों में भी लम्बे समय तक टिक सकें।
प्रयोगशाला में पहुंचे मिट्टी के नमूने Delhi Amritsar Katra Expressway

इसी प्रक्रिया के चलते वन विभाग की टीम ने गोहाना बेल्ट से मिट्टी के दर्जनों नमूने इकठे किये है जो विशेष रूप से जाँच के लिए मिट्टी एवं पानी जांच लैब में भेजे गए है। Delhi Amritsar Katra Expressway
ताकि इस मिटटी में उर्वरता, उसकी रासायनिक संरचना, पीएच स्तर और नमी सोखने की क्षमता अदि को सही से परखा जा सकें। कई बार देखने को मिलता है की पौधे मिटटी के अनुकूल न होने के कारण जल्द ही सुख जाते है। जिससे महनत के साथ साथ बजट का भी नुकसान होता है। जिसके चलते अब ऐसे जोखिम से बचने के लिए मिट्टी के अनुकूल पौधा लगाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मुख्यालय को भेजी जाएगी रिपोर्ट के अनुसार मास्टर प्लान
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद इसे विभाग के मुख्यालय भेजा जाएगा। वहां विशेषज्ञों की सलाह पर उन पौधों की सूची तैयार की जाएगी जो स्थानीय मिट्टी और जलवायु में तेजी से विकसित हो सकें। छायादार और फलदार वृक्षों के साथ-साथ ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी जो प्रदूषण कम करने और धूल को रोकने में सहायक हों। वैज्ञानिक तरीके से किया गया यह पौधारोपण न केवल एक्सप्रेसवे की सुंदरता बढ़ाएगा, बल्कि हाईवे पर होने वाले शोर और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होगा। Delhi Amritsar Katra Expressway
ग्रीन कॉरिडोर से सुधरेगा पर्यावरण Delhi Amritsar Katra Expressway
दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होती है, जिसकी भरपाई के लिए यह ग्रीनबेल्ट संजीवनी का काम करेगी। गोहाना खंड में प्रस्तावित इस ग्रीनबेल्ट से भविष्य में इस क्षेत्र का तापमान संतुलित रहने और जैव विविधता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार जैसे ही रिपोर्ट के आधार पर पौधों का चयन हो जाएगा। फिर आगे मानसून में यह कार्य धरातल पर लाया जाएगा।

