Jind Education : जींद नए शैक्षणिक सत्र में फीस बढ़ाने से पहले निजी स्कूलों को फार्म-6 अनिवार्य रूप से भरना होता है। जिले के 396 स्कूलों को एमआइएस पोर्टल पर आनलाइन माध्यम से फार्म-6 जमा करवाना है। जिसमें से 253 स्कूलों ने फार्म छह सबमिट कर दिया है और 143 स्कूलों द्वारा फार्म छह सबमिट करना बाकी है। शिक्षा निदेशालय के आदेशानुसार 31 मार्च तक फार्म-6 जमा करवाने का समय था।
पिछले सत्र की तुलना में 10 प्रतिशत फीस बढ़ने के आसार (Jind Education)
हालांकि फार्म छह सबमिट करने के बाद ही निजी स्कूल संचालक अपने स्कूलों में फीस की बढ़ोतरी कर सकते हैं। लेकिन अभिभावकों को फार्म छह की ज्यादा जानकारी नहीं होती। ऐसे में कुछ ऐसे स्कूल हैं, जो फार्म छह सबमिट किए बिना ही पिछले सत्र की तुलना में 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ा सकते हैं। ऐसे में हर वर्ष नए शैक्षणिक सत्र के दौरान अधिकतर निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी कर अभिभावकों की जेब पर आर्थिक बोझ डाला दिया जाता है। निदेशालय के आदेश अनुसार स्कूल संचालक 31 मार्च तक फार्म-6 आनलाइन माध्यम से भर सकते थे।

आवेदन कैसे भरे ? (Jind Education)
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फार्म-6 में स्कूल के मुखिया का नाम, फोन नंबर, ई-मेल आईडी, स्कूल का पिन कोड, प्रबंधन समिति या ट्रस्ट का नाम भरना जरूरी होता है। स्कूल की मान्यता की कापी भी लगाना आवश्यक है। इसके अलावा स्कूल की कक्षा अनुसार फीस से लेकर विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं व स्टाफ संबंधी जानकारी देना जरूरी है। साथ ही स्कूल की परिवहन व शैक्षणिक भ्रमण सहित सभी प्रबंधों की जानकारी देनी होती है। स्कूल केवल पंजीकरण, दाखिला, बोर्ड परीक्षा व फार्म में घोषित समग्र फीस ही ले सकेंगे।
इन 143 स्कूलों ने नहीं भरा फार्म छह (Jind Education)
जिले के 396 प्राइवेट स्कूलों में से 143 स्कूलों ने मंगलवार दोपहर तक फार्म छह सबमिट नहीं किया। इसमें 16 प्राइमरी, 25 मिडिल, 32 हाई स्कूल व 70 सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। फार्म-6 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसे हर निजी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले शिक्षा विभाग को देना होता है। इसमें स्कूल को फीस बढ़ाने का कारण, स्टाफ का वेतन, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, सुविधाओं और अन्य वित्तीय विवरण देना होता है। इसका उद्देश्य फीस वृद्धि को पारदर्शी और नियंत्रित रखना है। फार्म-6 आनलाइन भरा जाता है। शिक्षा विभाग पोर्टल खोलता है, जिस पर स्कूल लागिन कर जरूरी जानकारी अपलोड करते हैं।
प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल बढ़ाई जाती है फीस (Jind Education)
नरवाना रोड निवासी एडवोकेट वीरेंद्र जांगड़ा ने बताया कि, बेटे ने अभी 10वीं कक्षा की परीक्षा दी है, जो शहर के एक निजी स्कूल में पढ़ता है। प्राइवेट स्कूल संचालक हर साल फीस बढ़ा देते हैं। इसमें अलग-अलग एक्टिविटी चार्ज भी समय-समय पर जोड़ दिए जाते हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों को अच्छे निजी स्कूल में पढ़ाना आसान नहीं है।

वहीं कृष्णा कॉलोनी निवासी दिनेश कहना है कि अभिभावकों के लिए आज के समय में निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं है। छोटी कक्षाओं में ही बच्चों की फीस ज्यादा होती है। बेटी एलकेजी कक्षा में पढ़ती है। निजी स्कूल संचालक हर साल किसी न किसी बहाने से फीस बढ़ा देते हैं। फार्म छह भरे बिना फीस बढ़ाना गलत है। अभिभावकों को फार्म- 6 की ज्यादा जानकारी नहीं होती।
निजी स्कूल संचालक फार्म 6 भरने के बाद ही बढ़ा सकते हैं फीस (Jind Education)
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी महेंद्र सिंह के मुताबिक, नए शैक्षणिक सत्र में सभी स्कूलों को फार्म-6 आनलाइन भरना अनिवार्य है। फार्म छह अपलोड करने के बाद ही नए सत्र में फीस बढ़ोतरी कर सकेंगे। अगर किसी स्कूल ने फार्म-6 में भरी जाने वाली फीस से अधिक फीस विद्यार्थियों से वसूली तो शिक्षा विभाग की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फार्म 6 भरने के बाद ही निजी स्कूल संचालक नए सत्र में 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ा सकते हैं।

