Hisar Airport IFR: महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट हरियाणा के हिसार में इस एयरपोर्ट को IFR का लाइसेंस मिल गया है। जिसके चलते अब इस एयरपोर्ट से धुंध के चलते और बारिश जैसे खराब मौसम में भी फ्लाइट्स उड़ाई जा सकेगी। इस लाइसेंस के मिलने से एयरपोर्ट की संचालन क्षमता में काफी बड़ा विस्तार हुआ है। Hisar Airport IFR
जिसके चलते अब खराब मौसम में भी टेकऑफ हो सकेगा। इस फैसला से हरियाणा में हवाई कनेक्टिविटी मजबूत करने और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। अब तक यह एयरपोर्ट केवल Visual Flight Rules के तहत काम कर रहा था, जिससे उड़ान संचालन मौसम और रोशनी पर निर्भर रहता था. लेकिन अब इसे IFR लाइसेंस मिल गया है।
IFR लाइसेंस मिलने का क्या मतलब है Hisar Airport IFR

IFR एक आधुनिक नेविगेशन प्रणाली है जिसके चलते विमान जमीन पर उतने के लिए जमीं पर लगे यंत्रो और एयर ट्रैफिक सिग्नल के आधार पर ही चलते है। जिसके चलते बाहर से दिखने वाले दृश्य पर निर्भरता कम होती है। यही कारण है की इसकी मदद से खराब मौसम में भी फ्लाइट्स उड़ाई जा सकती है। कैप्टन अमित चौधरी के अनुसार, IFR लाइसेंस मिलने से एयरपोर्ट की विश्वसनीयता और सुरक्षा दोनों में सुधार होता है। Hisar Airport IFR
अब 24 घंटे संचालित हो सकेगा हिसार एयरपोर्ट
नए IFR लाइसेंस के मिलने से हिसार एयरपोर्ट अब दिन और रात के समय में भी अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर सकेगा। जिसके चलते कम रौशनी में भी उड़न पूरी हो सकेगी। अब करीब 1200 मीटर तक की दृश्यता में भी सुरक्षित उड़ान संभव हो सकेगी। जिसके चलते खराब मौसम में कम उड़ने रद्द होंगी।
हरियाणा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
हिसार एयरपोर्ट को विकसित करने का लक्ष्य हरियाणा को एक प्रमुख एविएशन हब बनाना है। राज्य सरकार पहले ही इसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। इससे कई फायदे होंगें अब क्षेत्र में व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा इसके अलावा यात्रियों के लिए बेहतर और नियमित उड़ान सुविधा मिलेगी और उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को फायदा होगा जिसके चलते रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
भारत में क्षेत्रीय एयरपोर्ट तेजी से हो रहे आधुनिक
भारत सरकार की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत पिछले कुछ वर्षों में कई छोटे एयरपोर्ट को आधुनिक बनाया गया है। IFR जैसी तकनीक जोड़ने से ये एयरपोर्ट अब बड़े शहरों के बराबर सुविधाएं देने लगे हैं। एविएशन सेक्टर के आंकड़ों के अनुसार, भारत में क्षेत्रीय एयरपोर्ट से यात्रियों की संख्या में पिछले पांच वर्षों में लगभग 35 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

