एकता क्रांति, हरियाणा।
Haryana June weather : हरियाणा में इस बार प्री-मानसून गतिविधियां अपेक्षा से अधिक सक्रिय रही हैं। 1 मार्च से 31 मई तक प्रदेश में औसतन 52.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश के मुकाबले लगभग 18 प्रतिशत अधिक है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में सामान्य वर्षा 44.6 मिलीमीटर मानी जाती है, लेकिन इस बार कई जिलों में बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले हुई अच्छी बारिश ने भीषण गर्मी से राहत देने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। राज्य के कई जिलों में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा दर्ज की गई।
Haryana June weather : कहां कितनी बारिश, देखें
कुरुक्षेत्र में 123 प्रतिशत, भिवानी में 116 प्रतिशत, महेंद्रगढ़ में 104 प्रतिशत और पलवल में 105 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा करनाल, जींद, फरीदाबाद और नूंह जैसे जिलों में भी सामान्य से बेहतर वर्षा हुई है। वहीं अंबाला, यमुनानगर, कैथल, हिसार, जींद और रोहतक सहित कुछ जिलों में बारिश का स्तर सामान्य से कम रहा, लेकिन प्रदेश का समग्र आंकड़ा औसत से ऊपर बना हुआ है।

IMD चंडीगढ़ के अनुसार 5 जून तक हरियाणा में मौसम परिवर्तनशील बना रहेगा। इस दौरान 3 से 4 जून के बीच कई जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय मौसमी सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश के उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में बादल छाए रहने तथा कहीं-कहीं बूंदाबांदी होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह भी दी है।
Haryana June weather : 5 जून के बाद बदलेगा मौसम
हालांकि 5 जून के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के बाद तापमान में फिर से बढ़ोतरी होगी और गर्मी का असर दोबारा महसूस किया जा सकता है। ऐसे में किसानों और आम लोगों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।
इस बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून अगले दो से तीन दिनों में केरल पहुंच सकता है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस बार मानसून की प्रगति सामान्य गति से आगे बढ़ेगी, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और जल संसाधनों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हरियाणा के लिए भी यह संकेत उत्साहजनक माने जा रहे हैं, क्योंकि प्री-मानसून की अच्छी शुरुआत अक्सर बेहतर मानसूनी सीजन का आधार बनती है।



