एकता क्रांति न्यूज, जींद।
Satbir Bangar Story : हरियाणा पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत सेक्टर आठ निवासी 69 वर्षीय सतबीर बांगड़ को साइकिल से विशेष प्रेम है। प्रतिदिन सुबह 35 से 40 मिनट वे साइकिलिंग करते हैं। इसके अलावा दिन में भी किसी सरकारी कार्यालय जाना हो या बाजार, साइकिल से ही जाते हैं। उनके पास 21 साल पुरानी साइकिल है।
साल 2005 में बेटी सोनम के लिए ये साइकिल खरीदी थी। तब सोनम 10वीं कक्षा में थी। सोनम ने स्कूल की पढ़ाई के बाद साइकिल चलानी छोड़ दी थी। जिसके चलते साइकिल को एक कमरे में रख दिया था। 10 साल पहले सतबीर बागड़ रिटायर हुए, तो उन्होंने इस साइकिल को चलाना शुरू किया। आज तक साइकिल को काफी अच्छे से संभाल कर रखा हुआ है। सतबीर बांगड़ का कहना है, साइकिल पर कहीं जाते हैं, तो तेल खर्च नहीं होता, धुआं नहीं निकलता और शोर भी नहीं होता।
Satbir Bangar : साधन संपन्न परिवार लेकिन साइकिल पर चलना पसंद
साइकिल पयार्वरण फ्रैंडली तो है ही, साथ ही बाजार में आसानी से पहुंच जाते हैं। गाड़ी में जाते हैं, तो जाम में फंसने का डर रहता है। सबसे अच्छी चीज, साइकिल पर चलने से एक्सरसाइज भी हो जाती है। जिससे शरीर फिट रहता है। सतबीर बांगड़ का काफी संपन्न परिवार है। उनकी बड़ी बेटी सविता लेक्चरर हैं। छोटी बेटी सोनम कुरुक्षेत्र के एक कालेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वहीं बेटा श्रवण वन विभाग में नौकरी करते हैं। घर पर गाड़ी व बाइक भी है। लेकिन सतबीर बांगड़ को साइकिल पर ही चलना पसंद है।
Satbir Bangar : ड्यूटी पर साइकिल पर जाते थे
1986 में जीआरपी थाना में रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी थी। तब कृष्णा कालोनी में मकान से स्टेशन तक साइकिल से ही वे आते- जाते थे। उनकी पत्नी निर्जन स्कूल में पीटीआइ थी। उनके पास कोई सामान पहुंचाना होता, तो साइकिल से ही जाते थे। जिससे उनकी साइकिल पर चलने की आदत बन गई। सतबीर बांगड़ सेक्टर आठ रेजिडेंस वेलफेयर सोसायटी के प्रधान भी हैं। सेक्टर से संबंधित कामों को लेकर एचएसवीपी कार्यालय जाना हो या लघु सचिवालय, वहां भी साइकिल से ही जाते हैं।



