एकता क्रांति न्यूज नेटवर्क।
Haryana weather update : हरियाणा में पिछले पांच वर्षों के दौरान मानसून सामान्य से कम रहने के बावजूद कृषि उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में वर्ष 2021 से 2025 के बीच तीन बार सामान्य से कम बारिश हुई, लेकिन बेहतर सिंचाई व्यवस्था और किसानों द्वारा अपनाई गई आधुनिक कृषि तकनीकों के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होने के बजाय बढ़ता गया। विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा में ट्यूबवेल आधारित सिंचाई नेटवर्क और कृषि प्रबंधन की मजबूती ने कम बारिश की चुनौती को काफी हद तक संतुलित किया है।
मौसम विभाग चंडीगढ़ (IMD) के अनुसार हरियाणा में मानसून सीजन (1 जून से 30 सितंबर) के दौरान वर्ष 2024 में सामान्य से लगभग 12 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। इसके बावजूद खरीफ सीजन में राज्य ने रिकॉर्ड 225.47 लाख टन उत्पादन हासिल किया, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक रहा। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में 571.5 मिमी वर्षा के साथ 173.02 लाख टन उत्पादन हुआ।
इसके बाद वर्ष 2022 में बारिश घटकर 465.8 मिमी रह गई, लेकिन उत्पादन बढ़कर 184.35 लाख टन पहुंच गया। वर्ष 2023 में 419.7 मिमी वर्षा दर्ज हुई और उत्पादन 208.79 लाख टन तक पहुंच गया। वर्ष 2024 में कम वर्षा के बावजूद रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, जबकि वर्ष 2025 में अब तक 568 मिमी बारिश दर्ज होने के साथ उत्पादन का अनुमान 217.39 लाख टन लगाया गया है।
Haryana weather update : सिंचाई व्यवस्था बनी किसानों की सबसे बड़ी ताकत
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हरियाणा में अधिकांश कृषि क्षेत्र सिंचाई सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। जहां पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध होती है, वहां कई बार कम बारिश फसलों के लिए लाभकारी भी साबित होती है। अत्यधिक वर्षा होने पर जलभराव, रोगों का प्रकोप और फसल खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि धान जैसी फसलों में नियंत्रित जल प्रबंधन से बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है। वहीं अधिक बारिश होने पर कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होती हैं।
Haryana weather update : खरीफ सीजन की बिजाई में तेजी
हरियाणा में खरीफ फसलों की बिजाई का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष धान का लक्ष्य लगभग 39 लाख एकड़ रखा गया है। इसके अलावा बाजरा, कपास, मूंग, ज्वार, ग्वार और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई भी विभिन्न जिलों में शुरू हो चुकी है। अब तक हुई बिजाई की तुलना पिछले वर्ष से की जाए तो कई फसलों के रकबे में वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों का रुझान मौसम और बाजार की मांग को देखते हुए फसल विविधीकरण की ओर भी बढ़ रहा है।
Haryana weather update : 4 से 6 जून तक आंधी और बूंदाबांदी के आसार
मौसम विभाग ने प्रदेश में 4 जून से मौसम बदलने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार 4 जून को कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। 5 और 6 जून को भी कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
Haryana weather update : किसानों के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून की प्रगति सामान्य रहती है और सिंचाई संसाधनों का प्रभावी उपयोग जारी रहता है, तो हरियाणा एक बार फिर कृषि उत्पादन के नए रिकॉर्ड बना सकता है। कम बारिश के बावजूद लगातार बढ़ते उत्पादन ने यह साबित किया है कि आधुनिक सिंचाई व्यवस्था, वैज्ञानिक खेती और किसानों की जागरूकता कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।



