एकता क्रांति न्यूज नेटवर्क।
Jind News : हरियाणा के जींद में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने रोडवेज जींद प्रशासन पर बस स्टैंड की कैंटीन को मिलीभगत करके ठेकेदार को किराये पर देने व उसको लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव करने के आरोप लगाए हैं।
सोमवार को कैंटीन में ठेकेदार द्वारा सूची के अतिरिक्त सामान बेचने जाने की शिकायत को लेकर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सोमवार को डीसी कार्यालय पहुंची। डीसी को दी शिकायत में स्वयं सहायता समूह के तहत संजीवनी महिला क्लस्टर फेडरेशन की सदस्य पूनम व संतोष ने कहा कि उन्होंने नए बस स्टैंड पर दो दुकान किराये पर ली हुई है। 18 मई को बस स्टैंड पर कैंटीन की बोली को लेकर रोडवेज की ओर से पत्र जारी किया गया था। उसने बोली में भाग लिया था।

18 मई को होने वाली बोली को रद कर दिया गया था। इसके बाद 21 मई को रोडवेज महाप्रबंधक की देखरेख में दोबारा से बोली हुई, जिसमें उन्होंने भी भाग लिया। वहां पर एक ठेकेदार ने कैंटीन किराए पर लेने के लिए फार्म भरा हुआ था। एक लाख 62 हजार से बोली शुरू हुई थी। उन्होंने भी एक लाख 88 हजार पर बोली लगाई, वहीं ठेकेदार ने एक लाख 90 हजार रुपये पर कैंटीन की बोली छुड़वा ली।
Jind News : 1 लाख 90 हजार रुपए पर छुड़वाई थी बोली
जिस ठेकेदार ने एक लाख 90 हजार रुपये पर कैंटीन की बोली छु़ड़वाई है, उसने महाप्रबंधक को बोली शुरू होने से पहले बोला था कि यहां बचत कम है। ऐसे में दुकान में सूची के अलावा क्या खाने-पीने की वस्तुओं को जोड़ सकते हैं। इस पर महाप्रबंधक ने बोलीदाता को मौखिक रूप से कहा था कि सूची के अलावा दूसरे खाने-पीने की चीजों के बेचने की अनुमति नहीं है। बोली के दौरान रिकार्डिंग भी हुई थी। एक लाख 90 हजार रुपये की बोली पर दूसरे बोलीदाता को कैंटीन किराए पर दे दी गई। उसी दिन ही उस बोलीदाता ने सूची से अलग खाने-पीने की चार चीज जोड़ दी।
जब कैंटीन की बोली हुई थी, तो उसमें नियमानुसार परोठा, दही, चना बटूरा, काफी, गर्म दूध, डोसा, चपाती, चावल, सलाद जैसी व्यंजन शामिल बेचने की अनुमति थी। जबकि दुकानदार ने पापकोन, कुरकुरे, कचौरी छोले के साथ व साधारण कचौरी को भी जोड़ दिया गया। अगर ज्यादा व्यंजन जोड़ने को लेकर उन्हें पहले अवगत करवा दिया जाता, तो वे इससे ज्यादा रुपये लगाकर बोली पर कैंटीन ले लेती।
Jind News : रोडवेज जीएम ने कहा नियमानुसार कर रहे काम
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए। वह बस स्टैंड पर एक दुकान का एक लाख 30 हजार रुपये महीने का किराया भर रहे हैं। अगर सूची से अलग यह फास्ट फूड की आइटम कैंटीन में बेचने की अनुमति दी जाती है, तो उन्हें घाटा होगा। महिलाओं ने कहा कि एडीसी ने मामले को लेकर उचित जांच का आश्वासन दिया है।
रोडवेज महाप्रबंधक राहुल जैन ने कहा कि वह नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं। अगर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से कोई शिकायत की गई है तो वे उसका जवाब दे देंगे।



