Shivratri Kab hai: 15 फरवरी को महाशिवरात्रि, जानें चतुर्दशी तिथि, पूजा का शुभ समय

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Shivratri Kab hai:  इस साल शिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जा रही है यह दिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि से दो दिन तक रहने के कारण सही डेट को लेकर असामजस्य था, लेकिन इस वर्ष 15 फरवरी को मनाई जा रही है। Shivratri Kab hai

पंचांग गणना के अनुसार चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम 5:04 बजे शुरू होकर 16 फरवरी की शाम 5:34 बजे तक रहेगी। इसी के चलते 15 फरवरी को ही पूजा और व्रत का सही समय है। निशीथ काल और प्रदोष काल भगतों के लिए शुभ बताए जा रहे है।

महाशिवरात्रि 15 फरवरी को क्यों Shivratri Kab hai

Shivratri Kab hai: Mahashivratri on February 15, know the Chaturdashi date, auspicious time for worship
Shivratri Kab hai: Mahashivratri on February 15, know the Chaturdashi date, auspicious time for worship

बता दें कि हर वर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि आती है। जिसके चलते इस बार चतुर्दशी तिथि दो दिनों तक होने के कारण शिवरात्रि के समय का सही से पता नहीं चल रहा है। धार्मिक परंपरा के जानकरों के मुताबिक अगर इस प्रकार 2 दिन तक तिथि होती है तो जिस दिन तिथि का उद्देय होता है उस दिन को ही पर्व माना जाता है। जिसके चलते शिवरात्रि को 15 फरवरी को मनाया जा रहा है।

पूजा का शुभ समय और राहुकाल shivaratri 2026

पंचांग गणना के अनुसार इस बार चतुर्दशी तिथि आरंभ 15 फरवरी शाम 5:04 बजे है और चतुर्दशी तिथि समाप्त 16 फरवरी शाम 5:34 बजे है जिसके चलते महाशिवरात्रि की पूजा में निशीथ काल यानी मध्यरात्रि का समय विशेष महत्व रखता है। इसके अलावा प्रदोष काल में भी शिव आराधना शुभ मानी जाती है। Shivratri Kab hai

अब 15 फरवरी को राहुकाल शाम 4:27 से 6:11 तक रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य और पूजा से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार मध्यरात्रि में की गई शिव आराधना को विशेष फलदायी माना गया है, क्योंकि यह समय भगवान शिव की उपासना का प्रमुख काल माना जाता है।

महाशिवरात्रि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

महाशिवरात्रि केवल व्रत या अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। जिसके चलते कई श्रद्धालु इसे शिव तत्त्व से जुड़ने का समय समझते है। धर्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जाप करने से मन एकाग्र होता है। और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

रुद्राभिषेक कैसे करें

महाशिवरात्रि 15 फरवरी को रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व बताया गया है। जिसके चलते इस प्रकार से पूजा सामग्री डाली जाती है इसमें पहले जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प लें और फिर गणेश पूजा से आरंभ करें जिसके बाद शिव परिवार की पूजा करें और शिवलिंग पर जल की धारा अर्पित करें फिर दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से अभिषेक करें , ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, अभिषेक के बाद शिवलिंग को स्वच्छ कर चंदन, पुष्प और इत्र अर्पित करें। Shivratri Kab hai

इस समय में पूजा में भक्ति और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है। इस समय पर मंदिरों में विशेष आयोजन होता है। और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भजन कीर्तन करतें है।

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