Hydrogen Train : हाइड्रोजन प्लांट का पहला ट्रायल रहा सफल, इलेक्ट्रिक के मुकाबले 3 गुणा तेजी से दौड़ेगी

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Hydrogen Train update : जींद। हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल को लेकर प्लांट में लगे कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत आखिरकार दो महीने बाद सफल रही है। बुधवार को हाइड्रोजन ट्रेन का पहला ट्रायल किया गया, जो सही रहा है। ट्रेन को पांडू पिंडारा के बीच दस किलोमीटर की दूरी में हाइड्रोजन इंजन के साथ चलाया गया है। इस दौरान ट्रेन लगभग 70 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चली है।

अभी कुछ और ट्रायल होंगे, लेकिन पहले ट्रायल के सफल होने के बाद ट्रेन के जल्द ट्रैक पर आने की उम्मीद है। एक बार सुचारू रूप से चलने के बाद यह ट्रेन इलेक्ट्रिक ट्रेन के मुकाबले 3 गुणा तेजी से दौड़ती नजर आएगी। हालांकि एक जनवरी को ट्रेन दिल्ली से जींद पहुंची थी। जांच के दौरान काफी खामियां आई थी, जिसे दूर करने में कर्मचारी लगातार मेहनत करते रहे।

Hydrogen Train : कई दिनों तक हुई टेस्टिंग, उसके बाद किया गया ट्रायल

जनवरी माह में पीएसीएमई (प्रिसिंपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर) डिंपी गर्ग ने अपनी टीम के साथ हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया था और कर्मचारियों को हर रोज टीडीएस जांच के लिए निर्देश दिए थे। वहीं जनवरी माह में ठंड के कारण गैस में नमी हो गई थी। इसके चलते इंजन में भरी गई हाइड्रोजन गैस को भी खाली कर नई गैस भरी गई थी। वहीं लखनऊ से विशेष कोच में केबल का सामान पहुंचा था। पीएसीएमई (प्रिसिंपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर) डिंपी गर्ग के निरीक्षण के बाद ट्रेन की टेस्टिंग में लगातार तेजी आई है।

Hydrogen Train Trial successful, making two trips at a speed of 70 kilometers per hour.
Hydrogen Train Trial successful, making two trips at a speed of 70 kilometers per hour.

29 जनवरी से लेकर तीन फरवरी तक पांच दिन भंभेवा स्टेशन पर हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन की टेस्टिंग की गई थी। पांच दिन की टेस्टिंग में इंजन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की गई है। वहीं जींद-सोनीपत ट्रैक पर झाड़ियों को साफ किया गया है। वहीं प्लांट में फायर सेफ्टी का काम भी लगभग पूरा हो चुका है।

Hydrogen Train : जनवरी माह में जांच के दौरान खामियों के कारण वापस लौट गई थी लखनऊ से आई टीम

जनवरी माह की शुरूआत में जब ट्रेन जींद पहुंची थी तो लखनऊ से आरडब्ल्यूएस टीम जांच के लिए लखनऊ से आई थी। इस दौरान टीम को काफी खामियां मिली थी और टीम वापस लौट गई थी। इसके बाद कर्मचारी लगातार जांच के दौरान आई खामियों को दूर करने में लगे रहे। इसके बाद लखनऊ से टीम वापस जींद पहुंची थी और ट्रेन में वायरिंग और प्लेटिंग का काम किया था। पहले 22 फरवरी को ट्रायल होनी थी, लेकिन उस दिन भी टीम ने यार्ड में ही ट्रेन के डिब्बों की जांच की थी।

Hydrogen Train update : कर्मचारी लगातार कर रहे प्रयास

हाइड्रोजन प्लांट में कर्मचारियों की मेहनत रंग लाई है। एक जनवरी को हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंची थी। जांच के दौरान कुछ खामियां आई थी, जिसे दूर करने के लिए कर्मचारी लगातार काम कर रहे थे। उनकी मेहनत का नतीजा है कि लगभग दो महीने बाद ट्रेन का पहला ट्रायल सफल रहा है।–संजय कुमार, हाइड्रोजन प्लांट प्रोजेक्ट मैनेजर

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