Rewari Narnaul railway: हरियाणा में रेल नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए एक अहम परियोजना शुरू की जा रही है। जिसके चलते रेवाड़ी से फुलेरा तक करीब 220 किलोमीटर लम्बे मार्ग का दोहरीकरण करके दोहरी लाइन में बदला जा रहा है। जिसे अब ट्रैन की आवा जाही और भी तेज होगी।
अब लम्बी दुरी की ट्रैन को और भी नया रुट मिलेगा जिसे यात्रा जल्दी से पूरी हो सकेगी। अधिकारीयों के मुताबिक इस परियोजना के अलग अलग हिस्सों में कार्य चल रहा है। जिसके चलते यह प्रोजेक्ट करीब एक साल में पूरा हो जाएगा। जिसके बाद से यहाँ ट्रैन की आवाजाही की संख्या भी बढ़ जाएगी। Rewari Narnaul Railway
पहले चरण में ये मार्ग होगा पूरा Rewari Narnaul railway

जानकारी के मुताबिक मार्ग के दोहरीकरण के लिए पहले चरण में कुंड से नारनौल तक का कार्य पूरा किया जाएगा और फिर दूसरे चरण में कुंड से रेवाड़ी और फिर नारनौल तक का कार्य पूरा किया जाएगा। इस नई परियोजना से राजस्थान और गुजरात से लेकर दिल्ली तक के यात्रियों को लाभ होगा।
रेवाड़ी से फुलेरा तक रेल मार्ग क्यों महत्वपूर्ण
रेवाड़ी फुलेरा रेल मार्ग उत्तर भारत के महत्वपूर्ण रेलवे कॉरिडोर में से एक माना जाता है। यह लाइन हरियाणा के रेवाड़ी और नारनौल को राजस्थान के रींगस से जोड़ती है। फुलेरा जंक्शन राजस्थान का प्रमुख रेलवे केंद्र है जहां से कई महत्वपूर्ण ट्रेनें गुजरती हैं। जिसके चलते रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार यह मार्ग दिल्ली से राजस्थान और गुजरात की दिशा में जाने वाली ट्रेनों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता बन सकता है। Rewari Narnaul Railway
अभी सिंगल लाइन होने से होती है परेशानी
अभी वर्तमान समय में नारनौल से लेकर फुलेरा तक सिंगल ट्रैक ही है जिसके चलते यहाँ ट्रैन का संचालन मुश्किल होता है। जिसके चलते एक ट्रैन को दूसरे स्टेशन तक पहुंचने के लिए रस्ते में सुपर फस्ट ट्रैन को आगे निकलने के लिए रुकना पड़ता है। जिसे कई ट्रैन को देरी होती है। रेलवे विश्लेषकों के अनुसार सिंगल लाइन वाले मार्गों पर संचालन क्षमता लगभग आधी रह जाती है। Rewari Narnaul Railway
दोहरीकरण से क्या बदल जाएगा
रेल लाइन के दोहरीकरण के बाद इस रूट पर कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जिसके बाद से ये संभावित लाभ होंगें इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और यात्रा समय कम होगा जिसके चलते मालगाड़ियों का संचालन आसान होगा। लंबी दूरी की नई ट्रेनें शुरू हो सकेंगी। डबल लाइन बनने से रेलवे नेटवर्क की क्षमता लगभग दोगुनी हो जाती है और ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार होता है।

