LPG Crisis Haryana: पुरे देश में LPG गैस जो की किल्लत को लेकर नई- नई चर्चाए हो रही है। यह चर्चा खाड़ी देशों में चल रहे विवाद के चलते इजरायल-ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण और भी तेज हो गई है। जिसके चलते अब गैस की आपूर्ति में कमी आई है। जिसके चलते लोग लम्बी लम्बी लाइनों में खड़े होकर सिलेंडर लेने की प्रतीक्षा कर रहे है। इसी के चलते हरियाणा सरकार द्वारा मिट्टी के तेल (केरोसिन) को वितरण करने की योजना बनाई है। LPG Crisis Haryana
एलपीजी संकट और मिट्टी के तेल की आपूर्ति LPG Crisis Haryana

जैसे की पहले भी बताया गया है कि LPG गैस की कमी के चलते लोग पहले ही काफी घबरा चुके थे लेकिन अब इसी घबराहट के बीच राहत की उम्मीद जाएगी है। सरकार ने मिट्टी के तेल देने की योजना पर विचार किया है। जिसके चलते हरियाणा में 8.76 लाख लीटर केरोसिन तेल वितरण किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को दी गई है। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राज्य सरकारों को अतिरिक्त केरोसिन तेल आवंटित करने का निर्णय लिया है। LPG Crisis Haryana
किसे मिलेगा केरोसिन तेल? LPG Crisis Haryana
केरोसिन तेल का वितरण राशन डिपो की दुकान पर ही तेल वितरण विपणन कंपनियों के रिटेल आउटलेट से किया जाएगा। यह तेल वितरण प्रणाली की प्रतिकता उन परिवारों को दी जाएगी जो BPL परिवार से सबंध रखते है। जिसके चलते ग्रामीण इलाके में यह तेल का वितरण ज्यादा किया जाएगा। हरियाणा में करीब 1.60 लाख परिवार इस समय इस योजना का लाभ उठा सकतें है। LPG Crisis Haryana
वितरण प्रक्रिया और दिशा-निर्देश
विभाग ने यह जानकरी दी है की मिटटी के तेल का प्रयोग केवल खाना पकाने और घर में रौशनी के लिए भी किया जाता है। अगर कोई भी व्यक्ति इस तेल का गलत प्रयोग करता है जैसे पेट्रोल या फिर डीजल में मिलावट के लिए तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। LPG Crisis Haryana
निगरानी और नियंत्रण
केंद्र सरकार की और से यह भी स्पष्ट किया गया है की तेल की पूरी मात्रा केवल 45 दिनों के अंदर ही उठान करना होगा। अगर इस समय के अंदर तेल का उठान नहीं हुआ तो बचे हुए तेल का उठान नहीं होगा और तेल को वैसे ही सुरक्षित रखा जाएगा। इसी के चलते आपूर्ति मंत्री ने इसपर कड़ी निगरानी रखने की बात भी कही है। ताकि तेल के वितरण में कोई भी गलती या भ्र्ष्टाचार न हो सकें। यह कदम राज्य में एलपीजी गैस संकट के दौरान ग्रामीण और गरीब परिवारों को एक वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने का प्रयास है।

