Kheda village pots : जींद के बेरी खेड़ा गांव के मटके पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध, मातू राम की तीसरी पीढ़ी भी बना रही मटके

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Kheda village pots : जींद जिले के पिल्लूखेड़ा ब्लाक के गांव बेरी खेड़ा के मटके पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं। गांव के कई परिवार लंबे समय से मटके बना रहे हैं। करीब 90 साल पहले मातू राम मटके बनाते थे। अब उनके बेटे धर्मसिंह और पौते प्रवीन इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

प्रवीन ने बताया कि मटके के लिए चिकनी मिट्टी की जरूरत होती है। बेरी खेड़ा गांव में मटके बनाने के लिए अच्छी मिट्टी उपलब्ध है। उनके मटकों की मांग वैसे तो पूरे साल रहती है। लेकिन गर्मियों में मांग और बढ़ जाती है। गांव से हजारों मटके आसपास के गांवों व दूसरे क्षेत्रों में जाते हैं।

 

Kheda village pots: The pots of Beri Kheda village of Jind are famous in the entire region, the third generation of Matu Ram is also making pots.
Kheda village pots: The pots of Beri Kheda village of Jind are famous in the entire region, the third generation of Matu Ram is also making pots.

मटके की पकाई में चार से पांच दिन का समय लगता है। वे विशेष रूप से मटकों का डिजाइन भी करते हैं। एक मटके की कीमत 100 से 120 रुपये रहती है। प्रवीन ने बताया कि उसके ताऊ ईश्वर भी मटके बनाते थे। अब उनके बेटे रोशन मटके बनाते हैं। मामचंद का लड़का टेकराम भी मटके बनाता है।

जींद शहर में भी मटके के कारोबार से कई परिवार जुड़े (Kheda village pots)

जींद शहर में भी नई सब्जी के पास दो परिवार मटके बनाते हैं। सफीदों गेट के पास भी मटके मिलते हैं। इनके पास अप्रैल में मटके खरीदने वालों की भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। रानी तालाब के पास, गोहाना रोड पर राजकीय कालेज के पास मटकों की बिक्री होती है। हालांकि शहर के आसपास मिट्टी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती, जिससे कुंभकारों को दिक्कत आती है।

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