D Plan Budget : डी प्लान का 87.91 प्रतिशत बजट खर्च करके जींद जिले ने प्रदेश में टाप तीन में जगह बनाई है। वहीं खर्च नहीं हो सकी करीब दो करोड़ रुपये की राशि सरेंडर करके सरकार को वापस भेज दी गई है। अधिकारियों के अनुसार कोई भी बिल लंबित नहीं था, जिसका भुगतान किया जा सके। इसलिए बची हुई राशि सरकार को वापस भेजी गई है। राशि सरेंडर नहीं की जाती, तो लैप्स होती। वहीं पिछले साल जींद जिला प्रदेश में करीब 86 प्रतिशत डी प्लान का बजट खर्च करके पहले स्थान पर रहा था।
जिले को डी प्लान के तहत 21 करोड़ रुपये मिले (D Plan Budget)
हमारे पाठकों को बता दें कि वित्त वर्ष 2025-26 में जिले को डी प्लान के तहत 21 करोड़ रुपये मिले थे। जिसमें से 19.79 करोड़ रुपये शहरी व ग्रामीण आबादी के हिसाब से विकास कार्यों के लिए अलाट की गई थी। जिसमें शहरी आबादी में 4.45 करोड़ और 15.34 करोड़ रुपये ग्रामीण आबादी में अलाट हुए थे। जबकि बाकी राशि पहले करवाए जा चुके कार्यों के बकाया भुगतान में खर्च किए जाने थे। 31 मार्च तक लगभग साढ़े 18 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कुल 374 कामों में से 347 काम पूरे हो चुके हैं। बाकी का काम चल रहे हैं।

डी प्लान से ये काम हुए (D Plan Budget)
डी प्लान की राशि से गलियां, चौपाल, सीवर लाइन, आंगनबाड़ी, सिंचाई और जनस्वास्थ्य विभाग से जुड़े कार्य करवाए गए हैं। नगर परिषद, जनस्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग सहित अन्य विभागों के माध्यम से डी प्लान के काम करवाए जाते हैं। जो काम हुए हैं, उनमें काफी काम एस्टीमेट राशि से कम में पूरे हो गए। जिससे उनका बजट बच गया। इस बची हुई राशि को दूसरे कार्याें में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। बची हुई राशि को सरकार को वापस भेजा जाता है।
सभी विभागों के सहयोग से अच्छा काम हुआ : एडीसी (D Plan Budget)
एडीसी प्रदीप कुमार ने कहा कि जिला परियोजना अधिकारी मुकेश कुमार व सभी विभागों के सहयोग से जिले में डी प्लान से काफी काम हुए हैं। करीब 88 प्रतिशत राशि खर्च होना सराहनीय है। डी प्लान का बजट खर्च करने में जींद प्रदेश के टाप तीन जिलों में रहेगा। पिछले साल जींद ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था।

