Thursday, May 28, 2026
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Hydrogen Train : जींद रेलवे स्टेशन बना देश की पहली ‘हाइड्रोजन राजधानी’, 120 करोड़ के प्लांट से भरेगा ट्रेन में फ्यूल

एकता क्रांति न्यूज। Hydrogen Train : हरियाणा के जींद से भारतीय रेलवे के इतिहास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित डीईएमयू ट्रेन चलाने को रेलवे बोर्ड ने आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह ट्रेन 10 कोच के साथ अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से संचालित होगी। रेलवे की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेशों के अनुसार ट्रेन संचालन आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन) और मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त की अंतिम रिपोर्ट एवं गति प्रमाण पत्र के आधार पर मंजूर किया गया है। रेलवे प्रशासन को सुरक्षा, तकनीकी और संचालन संबंधी सभी मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

Hydrogen Train : क्या है इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत

यह हाइड्रोजन ट्रेन 1200 किलोवाट क्षमता वाली होगी और डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब है कि पूरी शक्ति किसी एक इंजन में केंद्रित नहीं होगी, बल्कि पूरी ट्रेन में वितरित रहेगी। इससे ट्रेन अधिक संतुलित, ऊर्जा कुशल और सुरक्षित मानी जा रही है। ट्रेन को मेधा कंपनी और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) द्वारा तैयार डिजाइन के आधार पर विकसित किया गया है। चेन्नई में इसका निर्माण किया गया और एक जनवरी को इसे जींद लाया गया था।

hydrogen train jind haryana start railway approve
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Hydrogen Train : जींद बना देश का पहला हाइड्रोजन रेल हब

इस परियोजना के तहत जींद रेलवे स्टेशन पर लगभग 120 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक हाइड्रोजन प्लांट और स्टोरेज सिस्टम तैयार किया गया है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पीईएसओ) ने इस प्लांट और रीफ्यूलिंग सिस्टम को लाइसेंस भी जारी कर दिया है।

रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रीफ्यूलिंग के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा। सेंसर, वाल्व, डिस्पेंसर होज और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के पर्याप्त स्पेयर पार्ट्स रखने के निर्देश दिए गए हैं।

Hydrogen Train : कर्मचारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

हाइड्रोजन तकनीक को अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। इसी वजह से रेलवे बोर्ड ने हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रीफ्यूलिंग से जुड़े कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य किया है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कर्मचारियों को योग्यता प्रमाण पत्र भी जारी किए जाएंगे।

साथ ही हाइड्रोजन सेंसरों की नियमित सफाई और तकनीकी जांच का पूरा शेड्यूल तैयार करने को कहा गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

Hydrogen Train : शुरुआती 3 महीने रहेगा विशेष तकनीकी स्टाफ

रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि ट्रेन संचालन के शुरुआती तीन महीनों तक प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की टीम ट्रेन के साथ मौजूद रहेगी। रास्ते में यदि कोई तकनीकी खराबी आती है तो उसका तुरंत समाधान किया जाएगा। इसके अलावा कंट्रोल रूम में 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती और हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग डेटा की लगातार निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

हाइड्रोजन ट्रेन के रखरखाव के लिए दिल्ली के शकूरबस्ती में विशेष सुविधा विकसित की जाएगी। फिलहाल ट्रेन संचालन की अनुमति केवल जींद-सोनीपत ट्रैक तक सीमित है। इसलिए आवश्यकता पड़ने पर ट्रेन को लोकोमोटिव के जरिए डेड कंडीशन में शकूरबस्ती ले जाया जाएगा।

रेलवे बोर्ड ने दिए कई तकनीकी सुधार के निर्देश

रेलवे बोर्ड ने कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार भी निर्धारित समय सीमा में पूरे करने को कहा है। इनमें शामिल हैं:

  • छह महीने के भीतर अतिरिक्त स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट लगाना
  • तीन महीने में एयर स्प्रिंग सिस्टम में एफआईबीए प्रणाली लागू करना
  • फ्यूलिंग पॉइंट बॉक्स, आइसोलेशन कंट्रोल बॉक्स और इमरजेंसी स्टॉप बटन पर अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान करना

आरडीएसओ की टीम ने 25 से 28 फरवरी तक जींद-सोनीपत ट्रैक पर ट्रेन का सफल ट्रायल किया था। इसके बाद मुख्य संरक्षा आयुक्त ने 28 अप्रैल को अंतिम निरीक्षण और परीक्षण किया। सभी रिपोर्ट्स संतोषजनक मिलने के बाद रेलवे बोर्ड ने संचालन की अनुमति जारी कर दी।

क्यों खास है हाइड्रोजन ट्रेन

हाइड्रोजन आधारित ट्रेनें डीजल ट्रेनों की तुलना में लगभग प्रदूषण मुक्त मानी जाती हैं। इनमें कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता। यही वजह है कि दुनिया के कई देश अब हाइड्रोजन आधारित परिवहन प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

भारतीय रेलवे के लिए जींद-सोनीपत ट्रैक पर शुरू होने वाली यह परियोजना ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में देश के कई अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी।

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