PM-eBus Sewa Scheme: सरकार की और से शहरी परिवहन सेवा की तस्वीर बदलने के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री-ईबस सेवा योजना चलाई जाएगी। यह योजना उन शहरों में ही ज्यादा चलाई जाएगी जिनकी आबादी 3 लाख से लेकर 40 लाख के बिच में है।
राज्य मंत्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान बताया कि इस योजना के तहत करीब 10,000 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें करीब 116 शहरों में चलाई जाएगी। इस योजना में पूर्व उत्तर के पहाड़ी राज्यों को भी शामिल किया जाएगा। चाहे उन शहरों की आबादी 3 लाख से कम भी क्यों न हो।
ई-मोबिलिटी की दिशा में बड़ी छलांग PM-eBus Sewa Scheme

अब आवाजाही के लिए नए दौर की शुरुआत की जा रही है। इस योजन में शामिल होने वाले करीब 80 प्रतिशत शहर पहली बार इलेक्ट्रिक वाहनों के इकोसिस्टम से जुड़ेगें। इससे पर्यावरण को काफी लाभ होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकार ने खोला खजाना PM-eBus Sewa Scheme
बसों के साथ ही उनके रख रखाव और चार्जिग के लिए भी काफी निवेश किया जा रहा है। सरकार ‘बिहाइंड-द-मीटर’ (BTM) विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दे रही है। अब करीब 300 एकड़ से अधिक जमीन पर बस डिपो निर्माण को हरी झंडी मिल चुकी है। 1254.38 करोड़ रुपये की राशि 2025 के दिसम्बर तक दी जा चुकी थी। जिसमे से अभी केवल 484 करोड़ रुपये ही खर्च हुए है। PM-eBus Sewa Scheme
हजारों लोगों को मिलेगा सीधा रोजगार
मंत्रालय के अनुसार नौकरी के हिसाब से यह योजना दर्ज नहीं है लेकिन फिर भी इस परियोजना में कई युवाओं को नौकरियां मिलेगी। जिसके चलते इस प्रोजेक्ट में करीब 45,000 से 55,000 नौकरियां मिलेगी। मध्यप्रदेश के एक जबलपुर शहर में तो कार्य और भी तेज गति से हो रहा है। PM-eBus Sewa Scheme
जिसके चलते करीब 200 ई-बसों के लिए हाल ही में 12 फरवरी 2026 को रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इन शहरों की सड़कों पर नीले आसमान जैसी साफ और शोर-मुक्त बसें दौड़ती नजर आएंगी।
नई इ -बस चलने से छात्रों के साथ साथ नौकरी पेशे वाले लोगों को भी अपने स्थान पर पहुंचना और भी आसान होगा। यह बस सेवा सार्वजानिक परिवहन की स्तिथि तो मजबूत करेगी ही साथ ही पर्यावरण के लिए भी काफी लाभकारी सिद्ध होगी। इस नई बस व्यवस्था से ईंधन का भी बचाव होगा और जैसे की पहले भी बताया गया है की कई नई नौकरियों के भी अवसर पैदा होंगें।

