Safidon Factory Accident : जींद के सफीदों की गीता कालोनी में सात मार्च को फैक्ट्री में आग लगने से हुए हादसे में झुलसी मुआना गांव निवासी बिमला (84) की भी मौत हो गई है। बिमला का हिसार के निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। जहां वीरवार सुबह उपचार के दौरान बिमला ने दम तोड़ दिया।
इस हादसे में ये 10वीं मौत थी। हादसे में जान गंवाने वाली सभी महिलाएं मजदूर परिवारों से थी। वहीं पीजीआइ में उपचाराधीन तीन और महिलाओं की भी हालत काफी गंभीर बताई जा रही है। सात मार्च को गांव सिंघपुरा निवासी पिंकी (51), सफीदों के वार्ड नौ निवासी गुड्डी (50), डिग्गी मोहल्ला निवासी पूजा (30), आदर्श कालोनी निवासी उषा (45) की मौत हुई थी। उसके बाद भी मौत का सिलसिला नहीं रुक रहा है।
रोहतक पीजीआइ में दाखिल भाट कालोनी निवासी धनपति (55) और डिग्गी मोहल्ला निवासी सरिता (35) की अाठ मार्च को मौत हो गई। आठ मार्च की रात को पानीपत के एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन गीता कालोनी सफीदों निवासी ममता (35) की मौत हो गई। नौ मार्च की रात रोहतक पीजीआइ में उपचार के दौरान गीता कालोनी निवासी कमलेश (54) और पानीपन निजी अस्पताल में दाखिल गांव सिंघपुरा निवासी राजबाला (55) की की मौत हो गई थी।
इस हादसे में जान गंवाने वाली चार महिलाएं डिग्गी मोहल्ले से हैं।

ये परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। एक-एक कमरे के कच्चे मकान में परिवार रहते हैं। शोक जताने के लिए प्रतिदिन लोग पहुंच रहे हैं। जिन्हें बैठाने के लिए घर पर जगह नहीं है। एेसे में डिग्गी मोहल्ले में चौपाल में ही शोक जताने के लिए आने वाले लोगों को बैठाया जा रहा है।
पहले झाडू- पौछा करती थी सरिता, नौकरी छूटने पर फैक्ट्री में जाना शुरू किया था (Safidon Factory Accident)
डिग्गी मोहल्ला निवासी मृतक सरिता के दो बच्चे हैं। बेटी 16 साल की और बेटा 12 साल का है। दोनों पढ़ाई करते हैं। सरिता का पति मोहन मजदूरी करता है। मोहन का एक कमरे का कच्चा मकान है। सरिता ने चार- पांच माह पहले ही फैक्ट्री में काम करना शुरू किया था। उससे पहले वह एक मकान में झाडू-पौछा करती थी। मकान मालिक के बाहर जाने की वजह से वो नौकरी छूट गई, जिसके कारण उसने फैक्ट्री में मजदूरी करनी शुरू की थी।
पहले दो बेटों की मौत हो चुकी, अब बेटी भी चली गई, सात साल की नातिन रह गई (Safidon Factory Accident)
डिग्गी मोहल्ला निवासी पूजा का कई साल पहले पति से तलाक हो चुका था। वह अपने माता- पिता के पास ही रहती थी। दो भाई थे, जिनकी मौत हो चुकी है। डेढ़ साल पहले भाई दीपक की मौत हुई। करीब पांच साल पहले दूसरे भाई की मौत हुई थी। अब पूजा की भी मौत से परिवार पूरी तरह से टूट गया है। पूजा की सात वर्षीय बेटी गुड़िया है। जोकि अपने नाना राजू व नानी शकुंतला के साथ रहती हैं। बार- बार रोते हुए गुड़िया नाना- नानी से पूछती है कि उनकी मां कब आएगी। राजू व शकुंतला कच्चे मकान में रहते हैं। दोनों बेटों की मौत के बाद बेटी पूजा ही उनका सहारा थी। उनकी मौत के बाद नातिन गुड़िया के पालन- पोषण की भी जिम्मेदारी उन पर आ गई है।

बिमला के पति का दो साल पहले हो चुका निधन (Safidon Factory Accident)
हिसार निजी अस्पताल में उपचार के दौरान वीरवार को दम तोड़ने वाली मुआना निवासी बिमला का मायका डिग्गी मोहल्ले में ही है। पति सतकुवार का निधन दो साल पहले हो चुका है। उनके पांच लड़के व एक लड़की है। चार लड़के व एक लड़की की शादी हो चुकी है। एक लड़का कुंवारा है। एक लड़का बिजली निगम में नौकरी करता है, बाकी चार बेटे मजदूरी करते हैं। प्रतिदिन मुआना से मजदूरी करने के लिए सफीदों फैक्ट्री में आती थी। बिमला के भाई गुलाब ने बताया कि बहन की मौत से परिवार सदमे में है। घर के आर्थिक हालात कमजोर होने की वजह से ही 62 वर्ष की उम्र में भी बिमला मजदूरी करती थी।
उषा के लड़के मजदूरी करे हैं (Safidon Factory Accident)
सफीदों की आदर्श कालोनी निवासी उषा का भी मायका डिग्गी मोहल्ले में है। सात मार्च को हादसे के दिन ही उषा की मौत हो गई थी। उनके दो लड़के व तीन लड़की हैं। सभी की शादी हो चुकी है। लड़के ट्रक चलाकर व मेहनत मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। वहीं डिग्गी मोहल्ले की ही दो महिलाएं रानी व रानी देवी भी इस हादसे में झुलस गई थी। उनका रोहतक पीजीआइ में उपचार चल रहा है। इन दोनों के भी मकान कच्चे हैं और परिवार के आर्थिक हालात कमजोर हैं।

