Monday, May 25, 2026

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अरविंद केजरीवाल : जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने लगाई याचिका, जानिए सीबीआई ने क्या जवाब दिया ?

अरविंद केजरीवाल : दिल्ली की चर्चाओं में बनी आबकारी नीति मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और चार अन्य आरोपियों की उस मांग का विरोध किया है, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की अपील की है। CBI ने अपने हलफनामे में कहा कि जस्टिस शर्मा पर वैचारिक पक्षपात का आरोप लगाना बिल्कुल बेबुनियाद है।

आरएसएस के कार्यक्रम में जस्टिस का शामिल होने पर सीबीआई ने क्या दावा किया ? (अरविंद केजरीवाल)

याचिकाकर्ताओं ने यह दावा किया था कि जस्टिस शर्मा का झुकाव अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (ABAP) की ओर है, जो कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की कानूनी इकाई मानी जाती है। CBI ने कोर्ट को बताया कि किसी जज का किसी कानूनी सेमिनार में शामिल होना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि वह किसी विचारधारा से प्रभावित हैं। एजेंसी के अनुसार केवल इस आधार पर जज पर पक्षपात का आरोप लगाना न्यायपालिका की गरिमा को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने जैसा है, जो कोर्ट की अवमानना भी माना जा सकता है।

Arvind Kejriwal: Arvind Kejriwal files petition against Justice Swarana Kanta Sharma, know what CBI replied?
Arvind Kejriwal: Arvind Kejriwal files petition against Justice Swarana Kanta Sharma, know what CBI replied?

 

CBI ने कहा- यह आरोप लगाने का कोई सही कारण नहीं (अरविंद केजरीवाल)

CBI ने अपने हलफनामे में यह भी दावा किया है कि यदि ABAP के किसी कार्यक्रम में शामिल होना ही वैचारिक झुकाव का प्रमाण मान लिया जाए, तो देश के कई हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों को उन मामलों से खुद को अलग करना पड़ेगा जिनमें राजनीतिक रूप से चर्चित लोग आरोपी हैं। CBI ने यह भी कहा कि जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने आबकारी नीति मामले में कुछ आरोपियों के पक्ष में भी आदेश दिए हैं। इसलिए यह कहना कि वे किसी एक पक्ष के प्रति झुकी हुई हैं, सुनिश्चत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला (अरविंद केजरीवाल)

CBI ने सुनवाई में जल्दबाजी के आरोपों पर भी आपत्ति जताई। एजेंसी ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी से की जाए। ऐसे में कोर्ट द्वारा मामले को जल्दी सुनना किसी तरह का पक्षपात नहीं माना जा सकता। CBI ने उदाहरण देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े एक मामले की सुनवाई भी जस्टिस शर्मा कर रही हैं, जिसमें तीन महीने से भी कम टाइम में 27 बार सुनवाई हो चुकी है।

जस्टिस शर्मा को हटाने के लिए किस-किसने याचिका दर्ज की (अरविंद केजरीवाल)

पाठकों को बता दें कि,  अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर, अरुण पिल्लई और चनप्रीत सिंह रायत ने जस्टिस शर्मा को मामले से हटाने की मांग करते हुए आवेदन दायर किया है. इससे पहले 6 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल खुद दिल्ली हाईकोर्ट में पेश हुए थे, और अपनी रेक्यूजल याचिका पर दलीलें दी थीं. उन्होंने यह भी कहा था कि वह अपनी रेक्यूजल याचिका पर खुद ही कोर्ट में बहस करेंगे.

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