Muskan Driver Jind: हरियाणा की धरती पर हमेशा से ऐसी बेटियां है जो पुरे हरियाणा का नाम देश विदेश तक रोशन करती है। इन बेटियों की जिद ही इनका नाम चमकती है। ऐसे ही अब हरियाणा के जींद जिले की मुसकान जो डूमरखां कलां गांव की रहने वाली है। लोग उन्हें अब ड्राइवर छोरी के नाम से बुलाते है। यह ख़िताब उन्हें किसी शोक से नहीं बल्कि अपने परिवार के प्रति समर्पण के कारण मिला है।
बस्ते के बाद हाथ में ट्रैक्टर का स्टेयरिंग Muskan Driver Jind

12वीं कक्षा में पढ़ने वाली मुस्कान का दिन आम किशोरियों से बिल्कुल अलग है। सुबह स्कूल में पढ़ाई और घर लौटते ही वह अपनी वर्दी बदलकर खेतों की ओर निकल पड़ती है।
जहां उम्र की अन्य लड़कियां सोशल मीडिया या मेकअप के सामान में व्यस्त रहती हैं, वहीं मुस्कान खेत में ट्रैक्टर दौड़ाती नजर आती है। हल चलाना हो और बिजाई करनी हो। भारी-भरकम रीपर मशीन संभालना हो या फिर उबड़-खाबड़ खेतों को समतल करना जैसे कार्य में मुस्कान इतनी माहिर है कि बड़े-बड़े अनुभवी किसान भी उसकी कुशलता देखकर दंग रह जाते हैं।
तंज कसे गए लेकिन हिमत नहीं हरी Muskan Driver Jind
मुस्कान चार बहनों में सबसे बड़ी है। उसने बहुत छोटी उम्र में ही यह ठान लिया था कि वह अपने पिता को कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होने देगी। जिसके चलते शुरुआत में जब उसने ट्रैक्टर के स्टेयरिंग पर हाथ रखा, तो गांव के कई लोगों ने उसे टोकने और तंज कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
लड़कियों का काम रसोई संभालना है जैसी बातें भी सुनने को मिलीं। लेकिन मुस्कान ने सभी की बात को इग्नोर किया और आज वही लोग मुस्कान की मेहनत और हिम्मत की मिसाल देते नहीं थकते। Muskan Driver Jind
सिर्फ ट्रैक्टर ही नहीं, हर सवारी पर पकड़
मुस्कान की प्रतिभा केवल खेत तक सीमित नहीं है। वह बाइक, स्कूटी और कार चलाने में भी उतनी ही निपुण है। उसकी इसी बहुमुखी प्रतिभा और निडरता को देखते हुए उसके पिता ने उसे खुद का ट्रैक्टर भी लेकर दिया है। जब एक बार मुस्कान से उनके रंग-रूप और मेकअप को लेकर सवाल किया गया, तो उनका जवाब किसी का भी दिल जीत लेने वाला था। मुस्कान ने बड़ी सादगी से कहा, मेकअप तो बाद में भी हो सकता है, लेकिन मेहनत और समय की कद्र सबसे जरूरी है।
बदलती सोच का प्रतीक Muskan Driver Jind
जब हम हरियाणा के गांवों की बदलती तस्वीर को देखते हैं, तो मुस्कान जैसे चेहरे समाज की संकुचित सोच पर सीधा प्रहार करते नजर आते हैं। वह केवल एक ड्राइवर नहीं है, बल्कि उस बदलाव की अगुवाई कर रही है जहां बेटियां अब बोझ नहीं, बल्कि परिवार का मुख्य स्तंभ बन रही हैं।

