Petrol Diesel Price today 17 April: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और उथल पुथल के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे है जिसके चलते आम आदमी की जेब पर भी असर देखने को मिल सकता है। Petrol Diesel Price today
अभी के हालत देखने तो अमेरिका ईरान के बीच का तनाव कम होते नहीं दिख रहा जिसके चलते पिछले 24 घंटे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है इसी के चलते कच्चा तेल करीब 4 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो गया है। इसका असर भारत के तेल बाजार पर भी देखने को मिला है। जिसके चलते भारत में भी कई शहरों में तक की कीमत में वृद्धि हुई है।
कच्चे तेल में लगी आग 98 डॉलर के करीब ब्रेंट क्रूड Petrol Diesel Price today

ग्लोबल मार्केट की बात करें तो अभी ईरान और अमेरिका के बीच चल ताहि बातचीत में भी कोई हल निकलता नहीं दिख रहा जिसके चलते तेल की सप्लाई में बाधा उत्पन होने का डर है। शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 4 डॉलर की जबरदस्त तेजी के साथ 98.03 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा। वही WTI ने भी 3 डॉलर से ज्यादा की बढ़त के साथ 93.06 डॉलर प्रति बैरल पर है। जानकारों के मुताबिक अगर तनाव कम नहीं हुआ तो कच्चे तेल के दाम करीब 100 डॉलर के पार जा सकतें है।
यूपी के शहरों में असर
इसी के चलते UP के नोएडा महंगा में तेल महंगा हुआ है जबकि गाजियाबाद में मामूली राहत मिली है। सरकारी तेल कंपनियों ने आज सुबह जो नई दरें जारी की हैं, उनमें दिल्ली से सटे शहरों में मिला-जुला असर दिख रहा है। जिसके चलते नोएडा में पेट्रोल के दाम में 22 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद यह 95.12 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। डीजल भी 28 पैसे महंगा होकर 88.29 रुपये लीटर बिक रहा है। Petrol Diesel Price today
जबकि गाजियाबाद में नोएडा के ठीक उलट यहां मामूली राहत मिली है। पेट्रोल 11 पैसे सस्ता होकर 94.64 रुपये और डीजल 12 पैसे गिरकर 87.74 रुपये पर आ गया है। वही पटना की बात करें तोयहां पेट्रोल 105.23 रुपये और डीजल 91.49 रुपये के कल वाले भाव पर ही स्थिर है।
बड़े महानगरों का हाल दिल्ली-मुंबई में स्थिरता
शहर पेट्रोल डीजल
दिल्ली 94.72 87.62
मुंबई 103.44 89.97
चेन्नई 100.76 92.35
कोलकाता 104.95 91.76
क्यों थम नहीं रही तेजी Petrol Diesel Price today
जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की इस तेजी के पीछे शुद्ध रूप से जियोपॉलिटिकल रिस्क काम कर रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता सही नहीं होने का मतलब है कि खाड़ी देशों से होने वाली तेल की आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराते रहेंगे।
जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता, तब तक भारतीय तेल कंपनियों पर भी दबाव बना रहेगा। हालांकि, सरकार की कोशिश है कि घरेलू बाजार में बड़ी बढ़ोतरी को रोका जा सके, लेकिन स्थानीय वैट और माल ढुलाई के खर्च में बदलाव के कारण अलग-अलग शहरों में रेट ऊपर-नीचे हो रहे हैं।

