National Panchayati Raj Day : राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर जब हम पंचायती राज व्यवस्था की जड़ों को मजबूत करने की बात करते हैं, तब हरियाणा के बीबीपुर गांव से शुरू हुई एक अनथक यात्रा याद आती है। सुनील जागलान जो 2010 से 2015 तक सरपंच रहे। उन्होंने न केवल अपने गांव को बदल दिया, बल्कि पूरे देश के हजारों गांवों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गए। एक छोटे से गांव से कई गांवों तक विकास का सपना देखने और उसे साकार करने का उनका सफर आसान नहीं रहा। संसाधनों की कमी, सामाजिक बाधाओं और पुरानी व्यवस्था की जड़ों से जूझते हुए भी उन्होंने ग्राम सभा को सशक्त बनाकर पारदर्शिता की मिसाल कायम की।

सुनील जागलान ऐसे है देश के पहले सरपंच (National Panchayati Raj Day)
देश के पहले सरपंच बने जो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर व यूनिसेफ में सलाहकार के रूप में भी कार्यरत रहे। सुनील जागलान ने अपनी पंचायत को देश की पहली डिजिटल पंचायत, महिला हितैषी और बाल हितैषी पंचायत बनाया। ग्राम सभा के माध्यम से हर निर्णय लिया गया, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई। बेटी बचाओ, सेल्फी विद डाटर, गाली बंद घर, लाडो पंचायत जैसे अभियान उन्होंने शुरू किए। बेटियों के नाम पर नेमप्लेट, पीरियड चार्ट और लाडो पुस्तकालय आज देश की 50 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में अपनाए जा चुके हैं। इन अभियानों को शुरू करने में उन्हें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके अटूट संकल्प ने इसे राष्ट्रव्यापी आंदोलन बना दिया। वर्ष 2016 में राष्ट्रपति द्वारा उनके तैयार किए गए बीबीपुर माडल आफ विमेन एंपावरमेंट एंड विलेज डेवलपमेंट को अपनाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई राष्ट्रभाषा नेताओं ने उनकी इस पहल की सराहना की। यह माडल अन्य राज्यों में भी लागू हुआ, जो उनके जमीनी संघर्ष की जीत है।
लाखों पंचायतों को कर रहें हैं जागरुक (National Panchayati Raj Day)
पिछले 16 वर्षों से सुनील जागलान आफलाइन और आनलाइन दोनों माध्यमों से लाखों पंचायतों को जागरूक कर रहे हैं। ग्राम एशोसिएशन आफ भारत के शेरपा के रूप में वे गांव की परिभाषा को संविधान में शामिल करने और 29 अधिकारों को पूरे देश में समान रूप से लागू करवाने के लिए निरंतर संघर्षरत हैं। सरपंच पति की कुप्रथा को समाप्त करने और महिलाओं को धुरंधर लीडरशिप ट्रेनिंग देने का उनका अभियान सराहनीय है। उनकी पंचायत पर आधारित ए विलेज नेम्ड बीबीपुर पाठ आज आठवीं कक्षा में पढ़ाया जाता है। पंचायत कार्यों पर बनी डाक्यूमेंट्री फिल्म सनराइज को राष्ट्रपति से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, जो अब ट्रेनिंग में दिखाई जाती है। देश भर में वे बालिका पंचायतें तैयार कर रहे हैं और लड़कियों के लिए पुस्तकालय स्थापित करवा रहे हैं।

